जयंत चौधरी का अखिलेश यादव पर फिर पलटवार, बताया ABCD का नया मतलब; ‘चवन्नी’ विवाद में बढ़ी तल्खी
Jayant Chaudhary vs Akhilesh Yadav: राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के ‘राजनीति की ABCD हमने सिखाई’ वाले बयान पर एक बार फिर तीखा पलटवार किया है। इस बार जयंत चौधरी ने सीधे अखिलेश यादव का नाम लिए बिना ABCD का नया राजनीतिक अर्थ समझाते हुए निशाना साधा।
यह विवाद उस बयान के बाद शुरू हुआ था, जिसमें अखिलेश यादव ने गठबंधन को लेकर तंज कसते हुए कहा था कि उन्होंने ‘चवन्नी को रुपया बना दिया’। इसके बाद मामला केवल सपा और रालोद की जुबानी जंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जाट राजनीति और चौधरी चरण सिंह की विरासत से भी जुड़ गया।
‘व्यूज के लिए कुछ भी बोल देते हैं लोग’
जयंत चौधरी ने अपने ताजा बयान में कहा कि आजकल बहुत से लोग सुर्खियों में बने रहने और व्यूज बटोरने के लिए कुछ भी बोल देते हैं। उन्हें इस बात की परवाह नहीं होती कि उनकी कही बात सही है या गलत और उससे किसी की भावनाएं आहत होती हैं या नहीं।
इसी दौरान उन्होंने ABCD को लेकर तंज कसा। जयंत चौधरी ने कहा कि कुछ लोगों के लिए ABCD का मतलब अहंकार, भ्रष्टाचार, चोरी और धोखाधड़ी है।
उन्होंने इसके आगे चौधरी चरण सिंह की विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने चौधरी साहब से आदर देना, भावनाओं की कद्र करना, चरित्र की अहमियत समझना और धैर्यवान व्यक्तित्व को पहचानना सीखा है।
जयंत चौधरी के मुताबिक, चौधरी चरण सिंह ने जो ABCD सिखाई, उसका अर्थ कुछ और ही है।
अखिलेश यादव ने क्या कहा था?
दरअसल, विवाद की शुरुआत लखनऊ में लोध समुदाय के एक कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव के बयान से हुई थी। अखिलेश ने बिना किसी का नाम लिए गठबंधन को लेकर तंज कसते हुए कहा था, “हमने चवन्नी को रुपया बना दिया, फिर भी हम लोगों को छोड़कर चले गए।”
इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा था कि राजनीति की ABCD उन्होंने ही सिखाई है।
अखिलेश यादव की इस टिप्पणी को रालोद प्रमुख जयंत चौधरी ने गंभीरता से लिया। उनका कहना था कि अगर निशाना सिर्फ उन पर व्यक्तिगत रूप से साधा जाता तो शायद बात इतनी नहीं बढ़ती, लेकिन पूरे जाट समाज को इस विवाद में घसीटना और यह कहना कि उनकी राजनीति किसी और की देन है, स्वीकार नहीं किया जा सकता।
जयंत चौधरी ने लगाया जाट समाज को घसीटने का आरोप
जयंत चौधरी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि अगर सस्ती राजनीति करनी ही थी तो सीधे उनका नाम लेकर बात करनी चाहिए थी।
जयंत ने आरोप लगाया कि जाट समाज को इस विवाद में घसीटना और यह दावा करना कि राजनीति की ABCD उन्होंने सिखाई, अहंकार को दिखाता है।
उन्होंने यह भी कहा था कि उन्होंने इस तरह का अहंकार पहले भी करीब से देखा है और इतिहास गवाह है कि ऐसा रवैया अंततः पतन की ओर ले जाता है।
अखिलेश ने भी दिया था जवाब
जयंत चौधरी के हमले के बाद अखिलेश यादव ने भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी गठबंधन तोड़ने वाली पार्टी नहीं है।
अखिलेश ने इस पूरे विवाद का रुख भाजपा की ओर मोड़ते हुए कहा कि असली सवाल भाजपा से पूछा जाना चाहिए कि उसने रालोद को कितनी सीटें दीं।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि अगर भाजपा रालोद को 30 सीटें दे रही है तो उसे कम से कम 120 सीटें देनी चाहिए थीं। अखिलेश ने इसे जाट समाज के साथ-साथ चौधरी चरण सिंह और अजित सिंह की विरासत से भी जोड़ दिया।
‘ABCD का जवाब चुनाव में मिलेगा’
विवाद इसके बाद भी शांत नहीं हुआ। बागपत की एक सभा में जयंत चौधरी ने किसानों और गन्ने के दाम का मुद्दा उठाते हुए विपक्ष पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि विपक्ष को रसगुल्ले की चिंता छोड़कर गन्ने का मूल्य बढ़ाने की मांग करनी चाहिए। इसी दौरान ABCD विवाद पर उन्होंने संकेत दिया कि राजनीति में ABCD के आगे भी बहुत कुछ होता है और इसका जवाब चुनाव में मिलेगा।
अंकित बालियान हत्याकांड पर भी आमने-सामने आए दोनों नेता
इसी बीच शामली में हरियाणवी गायक अंकित बालियान की हत्या के बाद विवाद ने एक और मोड़ ले लिया। अखिलेश यादव ने इस घटना को जाट समाज की नाराजगी से जोड़ते हुए भाजपा और उसके जाट नेताओं पर सवाल उठाए।
इसके जवाब में जयंत चौधरी ने कहा कि हत्या जैसे गंभीर मामले में मृतक की जाति तलाशना और उसके आधार पर राजनीति करना बेहद संवेदनहीन रवैया है।
पश्चिमी यूपी की राजनीति में बढ़ी हलचल
जयंत चौधरी के ताजा ABCD वाले बयान से साफ है कि सपा और रालोद के बीच शुरू हुआ यह विवाद फिलहाल खत्म होता नहीं दिख रहा है।
‘चवन्नी’, ‘राजनीति की ABCD’ और जाट समाज को लेकर शुरू हुई बयानबाजी अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बनती नजर आ रही है। इसके साथ ही चौधरी चरण सिंह और अजित सिंह की राजनीतिक विरासत का सवाल भी इस बहस के केंद्र में आ गया है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट वोट बैंक का अपना खास राजनीतिक महत्व है। ऐसे में आने वाले चुनावों से पहले जयंत चौधरी और अखिलेश यादव के बीच बढ़ती तल्खी का असर दोनों दलों के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल जयंत चौधरी के नए ABCD वाले बयान ने यह साफ कर दिया है कि ‘चवन्नी’ और ‘राजनीति सिखाने’ वाली टिप्पणी का विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में दोनों नेताओं की ओर से और तीखे बयान सामने आ सकते हैं।
