‘बंटवारा 1947’ ने पर्दे पर जीवंत किया विभाजन का दर्द, सनी देओल के अभिनय ने जीता दर्शकों का दिल
Batwara 1947 Review: 14 अगस्त 1947… वह तारीख जब भारत के विभाजन ने लाखों लोगों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। सरहद की लकीर खिंची तो न जाने कितने परिवार अपने घर, जमीन और जड़ों से दूर हो गए। विभाजन की इसी दर्दनाक कहानी को निर्देशक राजकुमार संतोषी ने फिल्म ‘बंटवारा 1947’ के जरिए पर्दे पर उतारने की कोशिश की है।
स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले रिलीज हुई इस फिल्म को लेकर दर्शकों में खास उत्साह देखने को मिला। देहरादून में भारी बारिश और ऑरेंज अलर्ट के बावजूद दूसरे शो में सिनेमाघरों में दर्शकों की अच्छी भीड़ नजर आई।
एडवांस बुकिंग में भी दिखा उत्साह
फिल्म की रिलीज से पहले ही दर्शकों के बीच इसे लेकर उत्सुकता देखने को मिल रही थी। दमदार ट्रेलर के बाद फिल्म की एडवांस बुकिंग भी कई सिनेमाघरों में शुरू हो गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, दोपहर 2:30 बजे तक देशभर में फिल्म को करीब 8,886 शो मिले थे और लगभग 65,391 टिकटों की बिक्री हो चुकी थी।
बुजुर्गों के दर्द से जुड़ती फिल्म
‘बंटवारा 1947’ देखने पहुंचे कई दर्शकों का कहना था कि फिल्म उनके लिए सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि इतिहास से जुड़ने का एक जरिया है। देहरादून के दर्शक करनवीर सिंह ने बताया कि उनके पूर्वज भी पाकिस्तान में रहते थे और विभाजन के दौरान देहरादून आकर बस गए थे।
उन्होंने अपने बुजुर्गों से विभाजन के दौरान हुए दंगे, पलायन और संघर्ष की कहानियां सुनी थीं। उनका मानना है कि ऐसी फिल्में नई पीढ़ी को देश के इतिहास और उस दौर की त्रासदी को समझने में मदद कर सकती हैं।
सनी देओल और शबाना आजमी की एक्टिंग की तारीफ
फिल्म में सनी देओल ‘सिकंदर मिर्ज़ा’ के किरदार में नजर आ रहे हैं। दर्शकों ने उनके अभिनय, संवाद अदायगी और भावनात्मक दृश्यों की जमकर तारीफ की। वहीं शबाना आजमी के किरदार को भी दर्शकों ने फिल्म की अहम कड़ी बताया।
फिल्म में सनी देओल के साथ उनके बेटे करण देओल भी नजर आ रहे हैं और खास बात यह है कि फिल्म में दोनों पिता-पुत्र की भूमिका में ही दिखाई देते हैं। अभिमन्यु सिंह का नकारात्मक किरदार भी कहानी को और प्रभावशाली बनाता है।
‘आवारापन 2’ से हुआ क्लैश
14 अगस्त को ही इमरान हाशमी की फिल्म ‘आवारापन 2’ भी सिनेमाघरों में रिलीज हुई। ऐसे में दोनों फिल्मों के बीच बॉक्स ऑफिस पर सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है। हालांकि स्वतंत्रता दिवस और वीकेंड की छुट्टियों को देखते हुए ‘बंटवारा 1947’ से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।
कुल मिलाकर, ‘बंटवारा 1947’ उन दर्शकों के लिए खास फिल्म साबित हो सकती है जो देश के इतिहास, विभाजन की त्रासदी और उस दौर में आम लोगों के संघर्ष को करीब से महसूस करना चाहते हैं। फिल्म का भावनात्मक पक्ष और सनी देओल का दमदार अभिनय दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में कामयाब होता नजर आ रहा है।
