UCC को लेकर फैली अफवाहें: भोपाल में अचानक क्यों बढ़ी निकाह के आवेदनों की संख्या? जानें धारा 4(4) की पूरी सच्चाई
मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर फैली गलत जानकारियों और सोशल मीडिया संदेशों के कारण भोपाल में निकाह के आवेदनों में अप्रत्याशित उछाल देखा गया है। कजिन मैरिज (रिश्तेदारों में निकाह) पर रोक लगने के डर से कई परिवारों ने महीनों बाद होने वाली शादियों को आनन-फानन में पहले कराने का फैसला कर लिया।
हालांकि, वक्फ बोर्ड और शहर काजी ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक भ्रम है और कानून में धार्मिक परंपराओं को लेकर स्पष्ट छूट दी गई है।
निकाह के आवेदनों में भारी उछाल
- आंकड़ों में वृद्धि: सामान्य दिनों में काजी दफ्तरों में रोजाना 30 से 40 आवेदन आते थे, जो अफवाहों के बाद बढ़कर 200 से 300 तक पहुंच गए।
- तय तारीखों में बदलाव: जिन परिवारों की शादियां 4 से 6 महीने बाद तय थीं, उन्होंने कानूनी पाबंदी के डर से तुरंत निकाह कराने का विकल्प चुना।
- आर्थिक नुकसान का डर: परिवारों को चिंता थी कि मैरिज हॉल, कैटरिंग और अन्य तैयारियों में लगा पैसा कानून लागू होने पर बर्बाद न हो जाए।
क्या है डर की मुख्य वजह?
सोशल मीडिया पर यह संदेश तेजी से फैला कि UCC लागू होते ही ‘रक्त संबंधों’ और कजिन के बीच होने वाले निकाह पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। चूंकि मुस्लिम समुदाय में ऐसी शादियों का चलन रहा है, इसलिए तय रिश्तों वाले परिवारों में अनिश्चितता और घबराहट फैल गई।
वक्फ बोर्ड और काजी का स्पष्टीकरण: धारा 4(4) का प्रावधान
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. संवर पटेल और नायब शहर काजी मुफ्ती अली कादर ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है:
- परंपरा और प्रथा को छूट: UCC की धारा 4(4) के तहत उन वैवाहिक रिवाजों को संरक्षण दिया गया है जो स्थापित धार्मिक परंपरा या प्रथा का हिस्सा हैं। यदि दोनों पक्ष मुस्लिम हैं और उनकी स्थापित प्रथा ऐसे निकाह की अनुमति देती है, तो वह जारी रह सकती है।
- ड्राफ्टिंग में सुधार: शुरुआती हिंदी ड्राफ्ट के शब्दों से भ्रम पैदा हुआ था, जिसे बाद में स्पष्ट कर दिया गया है कि वैध परंपराओं पर कोई एकतरफा रोक नहीं है।
- अधिकारियों की अपील: अधूरी जानकारी या वायरल संदेशों के आधार पर शादी की तारीखों में जल्दबाजी न करें और कानून के आधिकारिक प्रावधानों पर ही भरोसा करें।
