विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: 1947 के उस दर्द को याद कर रहा भारत, PM मोदी ने पीड़ितों के साहस को किया नमन
नई दिल्ली: भारत आज, 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मना रहा है। यह दिन उन लाखों लोगों की पीड़ा, संघर्ष और साहस को याद करने का अवसर है, जिन्होंने वर्ष 1947 में देश के विभाजन के दौरान अपना घर-बार, जमीन-जायदाद और अपनों को खो दिया। विभाजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को अपना सब कुछ छोड़कर नए भारत की ओर पलायन करना पड़ा।
1947 में भारत की आजादी के साथ ही देश का विभाजन हुआ। पंजाब और बंगाल का भी विभाजन हुआ और सीमाओं के दोनों ओर बड़े पैमाने पर लोगों का विस्थापन हुआ। इस दौरान लाखों परिवारों को अपने पुश्तैनी घर छोड़ने पड़े और उन्हें बेहद कठिन परिस्थितियों में नई जिंदगी की शुरुआत करनी पड़ी।
PM मोदी ने विभाजन पीड़ितों को किया नमन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर 1947 के विभाजन के दौरान पीड़ा झेलने वाले लोगों को याद किया। उन्होंने कहा कि यह इतिहास का वह दौर था, जिसने असंख्य जिंदगियों को प्रभावित किया। परिवार उजड़ गए, लोगों ने अपनों को खोया और उन्हें भारी पीड़ा से गुजरना पड़ा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन कठिन परिस्थितियों से उबरकर लोगों ने शून्य से अपनी जिंदगी दोबारा शुरू की। उन्होंने अपनी मेहनत और साहस से मुश्किलों को कामयाबी में बदला और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि विभाजन से प्रभावित लोगों की जीवन-यात्राएं हमें इंसानी जज्बे और दृढ़ संकल्प की ताकत की याद दिलाती हैं।
‘सद्भाव और भाईचारे का संकल्प मजबूत हो’
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि यह दिवस देश में आपसी सद्भाव और भाईचारे को बनाए रखने के संकल्प को और मजबूत करे। उन्होंने सभी देशवासियों से एकजुट होकर विकसित भारत के निर्माण की दिशा में काम करने का आह्वान किया।
एक अन्य संदेश में प्रधानमंत्री ने विभाजन की त्रासदी से गुजरने के बाद देश की प्रगति में योगदान देने वाले लोगों को नमन किया। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने अपने साहस और सामर्थ्य से दिखाया कि विपरीत परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ा जा सकता है।
2021 से मनाया जा रहा है विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस
केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के तौर पर मनाने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य 1947 के विभाजन के दौरान पीड़ित लोगों के संघर्ष और पीड़ा को याद करना है।
सरकार का मानना है कि इस दिवस के जरिए नई पीढ़ी को विभाजन के दौरान लोगों द्वारा झेली गई कठिनाइयों और उस दौर की परिस्थितियों को समझने का अवसर मिलेगा। साथ ही, यह दिन समाज में एकता, सद्भाव और भाईचारे की भावना को मजबूत करने का संदेश भी देता है।
विभाजन ने उजाड़ दिए थे हजारों परिवार
1947 का विभाजन केवल नक्शे पर खींची गई एक सीमा नहीं थी, बल्कि इसने करोड़ों लोगों की जिंदगी बदल दी। कई परिवारों ने अपने घर, कारोबार और संपत्ति पीछे छोड़ दी। लाहौर, रावलपिंडी, अमृतसर, दिल्ली और बंगाल सहित कई क्षेत्रों में लोगों का बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ।
लाहौर के मशहूर सोने के व्यापारी नानकचंद का परिवार भी विभाजन की त्रासदी से प्रभावित हुआ था। उनकी लाहौर के फूला मंडी में दुकान थी और परिवार सुखी जीवन जी रहा था। लेकिन विभाजन के बाद उन्हें भी अपना सब कुछ छोड़कर भारत आना पड़ा।
आज का दिन ऐसे ही अनगिनत परिवारों की कहानियों, उनके संघर्ष और उनके साहस को याद करने का दिन है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह दिवस?
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस हमें इतिहास के उस अध्याय की याद दिलाता है, जिसमें इंसानियत ने भारी कीमत चुकाई। यह दिन उन लोगों को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश भी देता है कि समाज में एकता, शांति, सद्भाव और भाईचारा बनाए रखना कितना जरूरी है।
14 अगस्त का यह दिन उन सभी लोगों के साहस को नमन करने का अवसर है, जिन्होंने विभाजन का दर्द सहकर भी जिंदगी को फिर से खड़ा किया और आगे बढ़कर देश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
