वंदे मातरम संशोधन को राष्ट्रपति की मंजूरी, शशि थरूर बोले- क्या सम्मान कानून से लागू कराया जा सकता है?
vande matram
नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वंदे मातरम से जुड़े संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस संशोधन के तहत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर नए प्रावधान किए गए हैं। सरकार के मुताबिक, जानबूझकर राष्ट्रगीत के गायन में बाधा डालना या उसे रोकना अपराध माना जाएगा और इसे राष्ट्रीय गान को मिली कानूनी सुरक्षा के समान संरक्षण दिया जाएगा।
इस संशोधन को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह संशोधन संसद में बिना पर्याप्त चर्चा के पारित किया गया। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि वह राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों का बेहद सम्मान करते हैं।
शशि थरूर ने उठाया व्यावहारिक सवाल
शशि थरूर ने अपने पोस्ट में कहा कि वह राष्ट्रगीत के शुरुआती दो पद और पूरा राष्ट्रगान गा सकते हैं। लेकिन उनके मुताबिक, इस पूरे प्रावधान को लागू करते समय ‘इंसानी फितरत’ और व्यावहारिक पहलुओं को भी ध्यान में रखना चाहिए।
थरूर ने सवाल उठाया कि जन गण मन के दौरान लोगों को करीब 52 सेकंड तक सम्मानपूर्वक खड़ा रहना होता है, जबकि पूरे राष्ट्रगीत वंदे मातरम के गायन में करीब 3 मिनट 10 सेकंड लग सकते हैं।
उन्होंने तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां राज्य गीत को भी इन दोनों से पहले गाए जाने का प्रावधान है। ऐसे में कार्यक्रमों के दौरान लोगों को लंबे समय तक खड़े रहने की स्थिति बन सकती है।
‘क्या सम्मान और धैर्य कानून से लागू हो सकता है?’
कांग्रेस सांसद ने कहा कि सवाल यह है कि क्या हर सरकारी कार्यक्रम की शुरुआत और समापन पर लोगों से कई मिनट तक सम्मानपूर्वक खड़े रहने की अपेक्षा की जा सकती है।
थरूर ने आशंका जताई कि राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया यह कानून कहीं उलटा असर न डाल दे। उनके मुताबिक, सम्मान और धैर्य को केवल कानून के जरिए लागू नहीं कराया जा सकता।
उन्होंने कहा कि लोगों में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के प्रति सम्मान होना जरूरी है, लेकिन इसके लिए व्यावहारिक पहलुओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।
संसद में पास हो चुका है संशोधन विधेयक
वंदे मातरम से जुड़े संशोधन विधेयक को लोकसभा ने 30 जुलाई को पारित किया था। इससे एक दिन पहले राज्यसभा ने भी इसे मंजूरी दे दी थी। इसके बाद विधेयक राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद अब यह संशोधन कानून का हिस्सा बन गया है। सरकार का कहना है कि राष्ट्रगीत को राष्ट्रीय गान के समान कानूनी संरक्षण देना इसके सम्मान को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
वहीं, विपक्ष की ओर से इसे लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। शशि थरूर के बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि राष्ट्रगीत के सम्मान और उसके अनिवार्य पालन के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
